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Archive for the ‘मन के गुब्बारे...’ Category

 
धुएँ में घुल रहे हैं कुछ नज़ारे,
लेकिन पहचान की रेखाएं, ये धुआं नहीं मिटा सकता!
श्रद्धा मेरी कम न होगी, ‘प्रेरणा’!
लोग जो इतना पास आये, वो नहीं भूलते!
 
मेरे मानस पर यादों के चिह्न बड़े गहरे हैं!
रुके नहीं वो लोग, पर उनके शब्द तो ठहरे हैं!
 
चेहरों पर मुस्कान के पीछे कुछ चेहरे हैं!
 
आगे जाने वाली मुझको राह [...]

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“गर्चे है मुल्क-ए-दक्कन में इन दिनों कद्र-ए-सुखन;
कौन जाए ‘ज़ौक’ पर, दिल्ली की गलियाँ छोड़ कर!” 
       — इब्राहिम ‘ज़ौक’      
                             
मुल्क-ए-दक्कन की देख ली हमने बहुत कद्र-ए-सुखन;
दिल्ली बुला ले फिर हमें, इस दुआ में कटते हैं दिन!
फिर न जायेंगे कभी दिल्ली की गलियाँ छोड़ कर!
 
 

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Dear Kitty,
You might find it silly but I couldn’t think of any other way of reaching Anne. I imagine she is somwhere in heaven, among angels and fairies (I like to think she was always one of them ) and I’m sure she still talks her heart out to you (In fact, I kind of envy [...]

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